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दुमका जिले के एक बदनसीब इंसान की रुला देने वाली कहानी।

 दुमका जिला के जामा प्रखंड के नकटी (परगडीह),गांव की यह कहानी है!और यह सच्ची कहानी है।।

लगभग आज से 31-32 वर्ष पहले नकटी गांव मैं मनोज सिंह का जन्म होता है,मनोज सिंह के जन्म के उपरांत कुछ वर्षो यानी की 5 वर्ष  के बाद उनकी माता - पिता का देहांत हो जाता है।।

मनोज सिंह का चाचा जी भी है,लेकिन उस 5 वर्ष के मनोज सिंह के उपर उसके चाचा को तनिक सी भी दया नही आता है,लेकिन इस गांव मैं एक भला मानुष भी था जिसने मनोज सिंह को अपने घर मैं रहने, खाने - पीने,पढ़ाई - लिखाई की पूरी जिम्मेदार अपने कंधो पर उठाया,और मनोज को अपना सगा पुत्र जैसा प्यार दिया।।

             ठीक इसी तरह दिन बीतता गया मनोज रात को कभी - कभी अपने माता - पिता को याद करके अंदर ही अंदर रोता, लेकिन फिर अपने मन आपको समझाता की चलो अच्छे और खुशी के भी दिन आएंगे,मनोज को जिंदगी बहुत खुसहाल बीत रहा था।।


मनोज अब 18 वर्ष का हो गया था, गांव - घर के लड़को के साथ बाहर बड़े - बड़े शहर मैं काम की तलाश मैं निकल गया,और मनोज को काम भी मिला गया और अच्छी आमदनी भी करने लगा,मनोज का भी मन मैं शादी - ब्याह का सपने संजोने लगे 23,24 वर्ष की आयु मैं,मनोज सोचने लगा मेरा शादी होगा,बच्चे होंगे अब अपना भी कोई होगा,,।

 

मनोज सिंह जिनके यहां रह रहा था,जिनको अपना पिता मान रहा था, उस पिता ने मनोज की शादी गोड्डा जिला का रंगिनया गांव के एक पढ़ी - लिखी लड़की के साथ करा दिया!मनोज के शादी के बाद 1,2 वर्ष के उपरांत उनके वर्तमान पालनहार गार्जियन स्वरूप पिताजी का देहांत हो जाता है,जिस कारण मनोज को एक बार फिर बचपन वाली यादें ताजा हो जाती है,लेकिन फिर अपने मन को संभालता है,अब मनोज का एक लड़का भी हो जाता है,लेकिन अभी भी मनोज सिंह का कोई अपना घर नही है,बचपन मैं जिस घर मैं पला - बढ़ा वही घर मैं अभी भी रहा रहा था।।

अब मनोज की पत्नी का व्यवहार, चाल - चलन मैं परिवर्तन  होने लगा ,यानी की जिस घर मैं रह रहा था उस घर के सदस्यों से लड़ाई - झगड़ा,यहां तक कि अपने पति देव मनोज सिंह से भी हर समय लड़ाई - झगड़ा करते रहना,और अपने मायके के कहने से मनोज के सामने पैसे की डिमांड करना।।

      जिस कारण मनोज और उसकी पत्नी समेत बच्चे को भी उस घर से निकाल दिया जाता है,जिस घर मैं मनोज आज इतना बड़ा हुआ।।

फिर मनोज सिंह के सामने दुख की घड़ी आई मनोज और उसका परिवार 6 महीना दूसरे के घर मैं रहा,मनोज सिंह ने 6 महीने के अंदर अपना घर भी बना लिया, लेकीन उसकी पत्नी मनोज सिंह को बहुत,गाली - गलोज करता यहां तक कि मनोज की पत्नी अब दारू भी पीने लगी।।

मनोज को लगा कि मेरा जिंदगी झंड बन चुका है,अब मुझे इस दुनिया मैं मुझे नही जीना है,लेकिन फिर अपने बेटे को देखकर अपने आप को बहला लेता।।

मनोज सिंह 2022 जून महीने मैं कोलकाता मैं काम करा रहा था,जहां वह प्रायः काम करता था,एक दिन मनोज की पत्नी और उसकी सासू ने मनोज के साथ बहुत गाली - गलोज किया,मनोज अब अंदर से टूट गया और मनोज सिंह ने जहरीला पदार्थ खाकर अपने बच्चे को भी अनाथ कर दिया।।



मनोज सिंह के द्वारा एक लिखी हुई चिट्ठी जिसे आप सभी पढ़ सकते हो।



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