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अश्वगंधा की मांग अचानक तेजी से क्यों बढ़ रही है!एवम इसके चमत्कारिक फायदे जानकर आप हैरान हो जाएंगे?





आज के समय में देश - विदेश में अश्वगंधा की मांग बहुत ज्यादा है क्योंकि इसके अंदर बहुत सारे औषधीय गुण पाए जाते हैं।

जैसे: एंटीऑक्सीडेंट,लीवर टॉनिक,एंटी - एम्फलिमेट री,एंटी बैक्टिरियल के साथ - साथ प्रोटीन,फाइबर,कार्बोहाइड्रेट, आयरन,कैल्शियम,केरोटिन, विटामिन - सी पोषक तत्व पाए जाते हैं।


आइए देखते हैं,इस चमत्कारिक अश्वगंधा के फायदे:-


1) रक्तप्रदर एवं श्वेतप्रदर : अश्वगंधा के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 1-1 चम्मच गाय के दूध में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से लाभ होता है।


2) कृमि रोग (पेट के कीड़े) : इसके चूर्ण में बराबर मात्रा में गिलोय का चूर्ण मिलाकर शहद के साथ 5-10 ग्राम नियमित सेवन करने से लाभ होता है।


3)आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए : अश्वगंधा का चूर्ण 2 ग्राम, धात्रि फल चूर्ण 2 ग्राम तथा 1 ग्राम मुलेठी का चूर्ण मिलाकर 1 चम्मच सुबह और शाम पानी के साथ सेवन करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।


4)संधिवात (जोड़ों का दर्द) में : अश्वगंधा के चूर्ण की मात्रा 2 ग्राम सुबह-शाम गर्म दूध तथा पानी के साथ खाने से गठिया के रोगी को आराम हो जाता है।


5)कमर दर्द : अश्वगंधा के 2-5 ग्राम चूर्ण को गाय के घी या शक्कर के साथ चाटने से कमरदर्द और नींद में लाभ होता है।


6)कमजोरी : असगंध एक वर्ष तक यथाविधि सेवन करने से शरीर रोग रहित हो जाता है। केवल सर्दीयों में ही इसके सेवन से दुर्बल व्यक्ति भी बलवान होता है। वृद्धावस्था दूर होकर नवयौवन प्राप्त होता है।


7)खून की खराबी : 4 ग्राम चोपचीनी और अश्वगंधा का बारीक पिसा चूर्ण बराबर मात्रा में लें। इसे शहद के साथ नियमित सुबह-शाम चाटने से रक्तविकार मिट जाता है।


8) ज्वर : इसका चूर्ण पांच ग्राम, गिलोय की छाल का चूर्ण चार ग्राम, दोनों को मिलाकर प्रतिदिन शाम को गर्म पानी से खाने से जीर्णवात ज्वर दूर हो जाता है।


9)सभी प्रकार के रोगों में : लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग गिलोय का चूर्ण को 5 ग्राम अश्वगंधा के चूर्ण के साथ मिलाकर शहद के साथ चाटने से सभी प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं।


10)प्रदर : असगंध और शतावर का बराबर मात्रा का चूर्ण 3 ग्राम ताजे पानी के साथ सेवन करने से प्रदर में लाभ होता है।

नोट - ऊपर बताये गए उपाय और नुस्खे आपकी जानकारी के लिए है। कोई भी उपाय और दवा प्रयोग करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरुर ले और उपचार का तरीका विस्तार में जाने।


अश्वगंधा का मांग क्यों बढ़ती जा रही है?




आज के समय मैं बड़ी - बड़ी मल्टीनेशनल मार्केटिंग कंपनियां अश्वगंधा को फूड सप्लीमेंट प्रोडक्ट्स बना रही है,और लोगो को पहुंचा रही है,लोगो को भी बहुत सारा फायदा मिल रहा है,जिस कारण इसका मांगा बढ़ते जा रहा है।


अश्वगंधा की प्रजाति:-पूरे विश्व में अश्वगंधा की 3000 से भी अधिक प्रजातियां हैं। भारत में इसके महज 90 प्रजातियां पाई जाती हैं।भारत में प्रतिवर्ष इसका खपत तकरीबन 7000 टन के आसपास है जबकि उत्पादन सिर्फ 2000 तक ही सीमित है। इसका बेहतर उत्पादन करके किसान भाई भी अच्छी-खासी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।

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