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मशरूम की खेती और इसके फायदे

 आयस्टर मशरूम की खेती ने बदल दी हजारों महिला किसानों की तकदीर!




पिछले कुछ वर्षों के किसान यात्रा के दौरान हजारों ऐसे महिला किसानों से मिलना हुआ है जिन्होंने छोटे-बड़े स्तर पर ओयस्टर मशरूम उत्पादन करके अपने परिवार की तस्वीर बदल दी है! घर के छोटे से कोने में 20 से 50 हजार की लागत लाकर सलाना दो लाख से अधिक आमदनी अर्जित करके उन्होंने अपने जीवन स्तर में काफी सुधार लाया हैं। ओयस्टर मशरूम उत्पादन की बेहद सरल प्रक्रिया, कम लागत और सीमित संसाधनों की जरूरत के कारण हजारों महिला किसान इसके प्रति आकर्षित और सफल हुई है । इस पोस्ट में ओयस्टर मशरूम उत्पादन के तकनीकों पर फोकस किया गया है जिसे पढ़कर शुरुआत की जा सकती है। अपने आसपास के महिला किसानों के बीच में इस आर्टिकल को जरुर शेयर करें!


मशरूम अपने आप में एक बेहतरीन एक उत्पाद है।  किसान भाई इस खेती कै आम भाषा में बिना मिट्टी की खेती या फिर घर की खेती के नाम से भी बुलाते हैं।इसे एक कमरे में भी आसानी से उगाया जा सकता है। 


मशरूम में कई ऐसे जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जिनकी शरीर को बहुत आवश्यकता होती है। साथ ही ये फाइबर का भी एक अच्छा माध्यम है। कई बीमारियों में मशरूम का इस्तेमाल दवाई के तौर पर किया जाता है।इनमें विटामिन बी, डी, पोटैशियम, कॉपर, आयरन और सेलेनियम की पर्याप्त होती है. इसके अलावा, मशरूम में choline नाम का एक खास पोषक तत्व पाया जाता है जो मांसपेशियों की सक्रियता और याददाश्त बरकरार रखने में बेहद फायदेमंद रहता है।इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट भूरपूर होते हैं. मशरूम में मौजूद तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. इससे सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियां जल्दी-जल्दी नहीं होतीं. मशरूम में बहुत कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं, जिससे वह वजन और ब्लड शुगर लेवल नहीं बढ़ाता.मशरूम में बहुत कम मात्रा में कोलेस्ट्रॉल होता है और इसके सेवन से काफी वक्त तक भूख नहीं लगती।

#मशरूम_की_खेती


किसान विशेषकर तीन तरह के मशरूम की कर सकते हैं खेती

1. बटन मशरूम


2. ढिंगरी मशरूम (ऑयस्टर मशरुम)


3. दूधिया मशरूम (मिल्की)


ऑयस्टर मशरुम मशरूम उगाने की पूरी जानकारी..

ऑयस्टर मशरूम की खेती बड़ी आसान और सस्ती है। इसमें दूसरे मशरूम की तुलना में औषधीय गुण भी अधिक होते हैं। दिल्ली, कलकत्ता, मुम्बई एवं चेन्नई जैसे महानगरों में इसकी बड़ी माँग है। इसीलिये विगत तीन वर्षों में इसके उत्पादन में 10 गुना वृद्धि हुई है। तमिलनाडु और उड़ीसा में तो यह गाँव-गाँव में बिकता है। कर्नाटक राज्य में भी इसकी खपत काफी है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में भी ओईस्टर मशरूम की कृषि लोकप्रिय हो रही है।

ऑयस्टर की खेती 

 "स्पॉन (बीज) के जरिए मशरूम की खेती की जाती है, इसके लिए सात दिन पहले ही मशरूम के स्पॉन (बीज) लें, ये नहीं की एक महीने मशरूम का स्पान लेकर रख लें, इससे बीज खराब होने लगते हैं। इसके उत्पादन के लिए भूसा, पॉलीबैग, कार्बेंडाजिम, फॉर्मेलिन और स्पॉन (बीज) की जरूरत होती है। दस किलो भूसे के लिए एक किलो स्पॉन की जरूरत होती है, इसके लिए पॉलीबैग, कार्बेंडाजिम, फॉर्मेलिन, की जरूरत होती है।"


ऐसे करें शुरूआत..

दस किलो भूसे को 100 लीटर पानी में भिगोया जाता है, इसके लिए 150 मिली. फार्मलिन, सात ग्राम कॉर्बेंडाजिन को पानी में घोलकर इसमें दस किलो भूसा डुबोकर उसका शोधन किया जाता है। भूसा भिगोने के बाद लगभग बारह घंटे यानि अगर सुबह फैलाते हैं तो शाम को और शाम को फैलाते हैं तो सुबह निकाल लें, इसके बाद भूसे को किसी जालीदार बैग में भरकर या फिर चारपाई पर फैला देते हैं, जिससे अतिरिक्त पानी निकल जाता है।


इसके बाद एक किलो सूखे भूसे को एक बैग में भरा जाता है, एक बैग में तीन लेयर लगानी होती है, एक लेयर लगाने के बाद उसमें स्पॉन की किनारे-किनारे रखकर उसपर फिर भूसा रखा जाता है, इस तरह से एक बैग में तीन लेयर लगानी होती है।


25 दिनों में मिलने लगेगा ऑयस्टर


बैग में स्पॉन लगाने के बाद पंद 20 से 25 दिनों में इसमें ऑयस्टर की सफेद-सफेद खूटियां निकलने लगती हैं, ये मशरूम बैग में चारों तरफ निकलने लगता है। इस मशरूम में सबसे अच्छी बात होती है इसे किसान सुखाकर भी बेच सकते हैं, इसका स्वाद भी तीनों मशरूम में सबसे बेहत होता है।।।

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