*घटवाल - घटवार आदिम जनजाति का इतिहास।*
आज से लगभग 1000 वर्ष के करीब जब ब्राह्मणों का आगमन छोटनागपुर के रास्ते से हुआ,तो उनलोगो का झारखंड प्रांत मैं घटवाल - घटवार राजा, जमींदारों के साथ उनका मिलन हुआ।।
उस काल मैं घटवाल - घटवार लोग ही लगभग राजा - जमींदार हुआ करते थे,कुछ एक क्षेत्र को छोड़कर क्योंकि यह जनजाति उस समय की वीर लड़ाकू समुदाय की गिनती में आते थे।।
घटवाल - घटवार समुदाय के लोग लड़ने में तेज थे लेकिन बुद्धि से उतना तेज नही थे क्योंकि ई लोग जंगल, झाड़,पहाड़ों में निवास करते थे।।
ब्राह्मणों ने देखा कि इनकी संस्कृत,रीति,रिवाज ब्राह्मणों से बिल्कुल भी नही मिल रही है,क्योंकि घटवाल - घटवार समुदाय प्रोटो -ऑस्ट्रोलॉयड समूह आदिवासी से आते थे और हैं।
ब्राह्मणों ने सोचा कि झारखंड प्रांत क्षेत्र मैं अगर रहना है,तो घटवाल - घटवार लोगो के साथ मिलकर रहना होगा,लेकिन मिलकर कैसे रहे आर्य ब्राह्मणों का संस्कृति,रीति,रिवाज बिलकुल घटवालों से मिलाप नही हो रहा था,क्योंकि घटवाल लोग पेड़,पर्वत,प्रकृति को पूजते थे,पूजा मैं सुवर,मुर्गा, भेड़,दारू,खैनी से पूजा करते थे,और उपर से इन्ही लोगो के पास सत्ता और जमीन जायदाद ज्यादा था।
ब्राह्मणों ने बहुत सोच विचार करके देखा तब जाकर निर्णय लिया गया की घटवाल - घटवार समुदाय का क्षत्रिय करण किया जाय,चूंकि ब्राह्मण लोग तेज दिमाग और बहुत ज्यादा बुद्धिमान थे तो उनलोगो को घटवाल - घटवार राजा,जमीदारो को समझाने में ज्यादा देर नहीं लगा।।
सारे घटवाल - घटवार राजा और जमींदारों का क्षत्रिय करण करने का निर्णय लिया गया तो ऐसे में राजा,जीमांदार के जितने भी रिश्तेदार थे ब्राह्मणों ने सबका क्षत्रिय करण जेनवू पहनाकर कर दिया,बाद में वही लोग ठाकुर,टिकैत,बाबूवान कहलाए और अभी भी इसी संबोधन से पुकारे और जाने जाते हैं,और ई लोग अपने आपको राजपूत मानने लगे।
नोट :- घटवाल - घटवार समुदाय का क्षत्रिय करण होने से पहले सिंह और राय Title नही था,क्षत्रिय करण के बाद ब्राह्मणों ने यह पदवी दिया और साथ में गौत्र नाग गौत्र और कछुआ गौत्र जो की काल्पनिक है।
घटवाल - घटवार राजा,जमीदार लोगो को ब्राह्मणों ने समझाया की आप लोग भगवान राम के वंशज हो,आप लोग सूर्यवंश से आते हो,(जो की पूरी तरह से काल्पनिक है)फिर दौर चला पूजा,पाठ,यज्ञ का और दान,दक्षिणा मैं राजा,जमींदार लोग बहुत सारी जमीन ब्राह्मणों को दान के रूप में दे दिया।।पहले घटवाल - घटवार समुदाय के घरों में शादी - विवाह होने पर ब्राह्मण नही आते थे,लेकिन क्षत्रिय करण होने के बाद अब शादी - विवाह मैं ब्रह्मण आने लगे वेद पढ़कर विवाह होने लगा!और धीरे - धीरे ये लोग अपनी संस्कृति को भूलने लगे और आर्य संस्कृति को अपनाने लगे।।
घटवाल,घटवार लोगो में आज भी आदिवासी आदिम जनजाति की संस्कृति,रहन,सहन कहीं न कहीं झलकती है।और सही मायने में यही एक समुदाय है जो झारखंड की प्राचीन जनजाति है,लेकिन आर्य ब्राह्मणों से इनलोगो की ज्यादा नजदीकिया होने के कारण इन लोगो की संस्कृति,भाषा,रीति - रिवाज को इतिहास में बहुत कम ही लिखा गया है।।
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आशा करता हूं,आपलोगो को यह ब्लॉग पोस्ट अच्छा लगा हो,बहुत रिसर्च और काफी खोजबीन करने के बाद मैं यह लिखा हूं,और भी बहुत सारी चीजें लिखना है जो की आगे की भाग - 2 में आप सबों के बीच लेकर आऊंगा।
धन्यवाद
जोहार
जय आदिवासी

10 Comments
Bahut achchhi Jankaari
ReplyDeleteJohar
Jay Aadivaasi
इसे किसी भी तरह Wikipedia में डालें 🙏
ReplyDeleteSahi bole
Deleteजी बहुत जल्द विकिपीडिया में डाल दूंगा।
DeleteJay
ReplyDeleteJOHAR
this information is very important for our adivasi Ghatowar and Ghatuwal Samaj
ReplyDeleteJai Adivasi
ReplyDeleteJohar
ReplyDeleteBahut achchhi jankari
ReplyDeleteJohaar
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